बकरा ईद क्यो मानते है |Bakra Eid kyu Manate hai ( Why is Eid al-Adha celebrated? )
इस्लाम धर्म का पवित्र त्योहार बकरीद या ईद-उल-अजहा 20 जुलाई को है. लेकिन क्या आपको इसके इतिहास और महत्व की जानकारी है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्यों बकरीद मनाई जाती है-
इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान में बकरीद का स्पष्ट वर्णन मिलता है. ऐसा बताया जाता है कि अल्लाह ने एक दिन हजरत इब्राहिम से सपने में उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी. हजरत इब्राहिम सबसे ज्यादा अपने बेटे से बहुत प्यार करते थे, लिहाजा उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया.
शैतान ने जब हज़रत इस्माईल को बहकाने की कोसिस
तब बेटे इस्माइल ने कहा ऐ मरदूद शैतान तू मुझे बहकना चाहता है अगर अल्लाह का हुक्म हो तो मेरा एक सर तो क्या 100 बार भी कुर्बान होना पढे तो अल्लाह के हुक्म पर कुर्बान कर दूँ , जब कुर्बानी का वक़्त आया जैसे ही अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाया वैसे ही अल्लाह के हुक्म से हज़रत इस्माइल के जगह एक दुम्बा ( बकरा ) आ गया, अल्लाह ने उसे बचाकर एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी. तभी से इस्लाम धर्म में बकरीद मनाने का प्रचलन शुरू हो गया.
ईद-उल-जुहा यानी बकरीद हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में ही मनाया जाता है. हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुकुम पर अपनी वफादारी दिखाने के लिए बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने को तैयार हुए थे.
कुर्बानी का गोस्त लोगो मे तकसीम करना
बकरीद का पर्व इस्लाम के पांचवें सिद्धान्त हज को भी मान्यता देता है. बकरीद के दिन मुस्लिम बकरा, भेड़, ऊंट जैसे किसी जानवर की कुर्बानी देते हैं. बकरीद के दिन कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. एक खुद के लिए, दूसरा सगे-संबंधियों के लिए और तीसरा गरीबों के लिए
इस पर्व पर इस्लाम धर्म के लोग साफ-पाक होकर नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ते हैं. नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी की प्रक्रिया शुरू होती है. और कुर्बानी की जानवर की गोस्त को गरीबो ओर रिस्तेदारों में तकसीम करते है और इस तरह से बकरा ईद मनाया जाता है सभी भाई को ईद अल अजहा ( Eid Al Adha ) की बहुत बहुत मुबारकबाद आप सभी को
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