हजरत अली कौन थे | हज़रत अली की जीवनी | (Hazrat Ali History) Hazrat Ali Biography
अली इब्ने अबी तालिब (अरबी : علی ابن ابی طالب) का जन्म 17 मार्च 600 (13 रज्जब 24 हिजरी पूर्व) मुसलमानों के पवित्र स्थल मक्का के अन्दर हुआ था। वे हजरत पैगम्बर मुहम्मद (स.अ. व.) के चचाजाद भाई और दामाद थे और उनका चर्चित नाम हज़रत अली है। वे मुसलमानों के चौथे ख़लीफ़ा के रूप में जाने जाते हैं ।
हज़रत अली की बीबी : Wife of Hazrat Ali
बता दें कि मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम हजरत अली ही थे। हजरत पैगम्बर मोहम्मद साहब की बेटी फातिमा से हजरत अली की शादी हुई थी। हजरत अली के जन्मदिन के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग एक-दूसरे को उनके जन्मदिन की बधाई देते हैं तो उनके द्वारा कहे गए शांति संदेशों को भी याद करते हैं। हजरत अली ने लोगों को शांति और अमन का पैगाम दिया था। आइए जानते हैं हजरत अली आखिर कौन थे। और जीवनी पढ़ते हैं...
हज़रत अली को थे | Hazrat Ali Kon The | Who was Hazrat Ali ?
हज़रत अली (Hazrat Ali History) की जीवनी
हजरत पैगम्बर मोहम्मद साहब के बाद मुस्लमानों के चौथे खलीफा थे। इनका जन्म मक्का में हुआ था। हजरत अली के बेटे हुसैन ने कर्बला की लड़ाई में भूखे-प्यासे रहकर बताया कि जेहाद किसे कहते हैं। वहीं हजरत अली ने अमन और शांति का पैगाम दिया और बता दिया कि इस्लाम अहिंसा के पक्ष में है। उन्होंने कहा था कि इस्लाम इंसानित का धर्म है। उन्होंने हमेशा प्रेम और समाज से भेद-भाव हटाने की कोशिश करी। हजरत अली ने कहा था कि अपने दुश्मन से भी प्रेम किया करों तो एक दिन वह तुम्हारा दोस्त बन जाएगा। उनका कहना था कि अत्याचार करने वाला, उसमें सहायता करने वाला और अत्याचार से खुश होने वाला भी अत्याचारी ही है।
हज़रत इमाम अली अ.स. (Hazrat Ali) की ज़िंदगी
हजरत अली कौन थे|हज़रत अली की जीवनी|(Hazrat Ali History)
इमाम अली अ.स. (Hazrat Ali) की ज़िंदगी की एक और अहम बात यह थी कि आप हमेशा बे सहारा लोगों की मदद करते थे, ज़ाहिर है समाज में बे सहारा और ग़रीब लोगों को और कुचल दिया जाता है न उनकी फ़रियाद कोई सुनता है न उनके साथ अदालत और ईमानदारी के साथ सुलूक होता है, लेकिन आपने अदालत को जारी करते हुए न केवल ऐसे लोगों की मदद की बल्कि अपनी करामत और शराफ़त की मिसाल भी पेश, पैग़म्बर स.अ. आपकी इस सिफ़त के बारे में फ़रमाते थे कि यह अल्लाह का दिया हुआ तोहफ़ा है और ऐ अली (अ.स.) अल्लाह ने आपको बनाया ही इस तरह है कि आप बे-सहारा और ग़रीब लोगों की मदद करते रहें और उनके साथ समय बिताएं, और आप उनको अपनी पैरवी करने वाले समझ कर उनसे मोहब्बत करें और वह आपको अपना इमाम समझ कर।
हज़रत अली का अखलाकी जिंदगी ।
हजरत अली कौन थे|हज़रत अली की जीवनी|(Hazrat Ali History)
आप बाग़ों में काम करके इतनी रक़म हासिल कर लेते थे कि आपकी ज़िंदगी आराम से गुज़रे लेकिन आप उस सभी रक़म को अल्लाह की राह में ख़र्च कर देते थे, आपका हक़ छीनने के समय की ज़िंदगी हो या ज़ाहिरी ख़िलाफ़त पर आने के बाद की दोनों में आपने साधारण जीवन बिताया है, जबकि उस समय मुसलमानों की ताक़त के हर तरफ़ चर्चे थे और मुसलमान अच्छी ज़िंदगी गुज़ार रहे थे लेकिन आपने अपने लिए सादी ज़िंदगी ही को चुन रखा था, आप ख़ुद ही फ़रमाते थे कि ख़ुदा की क़सम मेरे कपड़ों पर इतना रफ़ू हो चुका है कि अब रफ़ू करने वाले को देने से शर्म आने लगी है, आपने लगभग पांच साल हुकूमत की लेकिन इस दौरान ना ही एक ईंट अपने घर में लगाई ना ही कोई ज़मीन अपने नाम की, बल्कि जैसे ज़ाहिरी हुकूमत से पहले एक साधाराण इंसान की तरह ज़िंदगी गुज़ार रहे थे बिल्कुल उसी तरह हुकूमत के आने बाद भी एक सादा ज़िंदगी गुज़ार रहे थे
हज़रत अली की सहादत : Hazrat Ali ki Sahadat हज़रत अली को कैसे शाहिद किया : Hazrat Ali ko kaise shahid kiya
हजरत अली कौन थे|हज़रत अली की जीवनी|(Hazrat Ali History)
18 रमज़ान (इस्लामिक कैलंडर का नौवां महीना) की रात हज़रत अली (Hazrat Ali) ने नमक और रोटी से रोज़ा इफ्तार किया. रिवायतों में उनकी बेटी ज़ैनब के हवाले से मिलता है कि रातभर बाबा (अली) बेचैन रहे. इबादत करते रहे. बार-बार आंगन में जाते और आसमान को देखते.
हज़रत अली की शहादत : Hazrat Ali ki shahadat
हजरत अली कौन थे|हज़रत अली की जीवनी|(Hazrat Ali History)
19 रमज़ान को सुबह की नमाज़ पढ़ाने के लिए अली मस्जिद पहुंचे. मस्जिद में मुंह के बल अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम नाम का शख्स सोया हुआ था. उसको हजरत अली ने नमाज़ के लिए जगाया. और खुद नमाज़ पढ़ाने के लिए खड़े हो गए. इब्ने मुल्जिम मस्जिद के एक ख़म्भे के पीछे ज़हर में डूबी तलवार लेकर छिप गया. हजरत अली ने नमाज़ पढ़ानी शुरू की. जैसे ही सजदे के लिए अली ने अपना सिर ज़मीन पर टेका, इब्ने मुलजिम ने ज़हर में डूबी हुई तलवार से हजरत अली के सिर पर वार कर दिया. तलवार की धार दिमाग़ तक उतर गई. ज़हर जिस्म में उतर गया.
हज़रत अली (अ. स.) ने कातिल को भी माफ किया
हजरत अली कौन थे|हज़रत अली की जीवनी|(Hazrat Ali History)
19 रमज़ान को हजरत अली अ. पर इराक में कूफा शहर की मस्जिद में सुबह की नमाज में एक अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम ने तलवार से हमला किया जिससे 21 रमजान सन 40 हिजरी (29 जनवरी 661) को हजरत अली अ. की शहादत हुई । हजरत अली र. अ. का एजाज मोजिज़ा) ये है कि वो काबे में पैदा हुए और शहादत मस्जिद में पाई. अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम की तलवार सर पर लगते ही मौला ने दोनों हाथों से अपना सर पकड़ कर एलान किया- काबे के रब की कसम मैं कामयाब हो गया.
उसके बावजूद उन्होंने अपने कातिल को माफ करने की बात कही। कहा जाता है कि हजरत अली अपने कातिल को जानते थे उसके बावजूद उन्होंने सुबह की नमाज के लिए उसे उठाया था और नमाज में शामिल किया था।
अली का कत्ल किसके कहने पर किया गया
हजरत अली कौन थे|हज़रत अली की जीवनी|(Hazrat Ali History)
अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम के बारे में कहा जाता है कि उसने ये अटैक मुआविया के उकसावे में आकर किया. मुआविया अली के खलीफा बनाए जाने के खिलाफ था. अली के जिस्म में ज़हर फैल गया हकीमों ने हाथ खड़े कर दिए और फिर 21 रमजान को वो घड़ी आई, जब मुसलमानों के चौथे खलीफा अली इस दुनिया से रुखसत हो गए. मुआविया की दुश्मनी अली की मौत के बाद रुकी नहीं. उनके बाद अली के बड़े बेटे हसन को ज़हर देकर मारा गया और फिर कर्बला (इराक) में अली के छोटे बेटे हुसैन को शहीद किया गया.
हज़रत अली ने अमन और शान्ति का पैगाम दिया
हजरत अली कौन थे|हज़रत अली की जीवनी|(Hazrat Ali History)
आज के दौर मे हज़रत अली (Hazrat Ali) की जीवन दर्शन प्रसांगिक है. उन्होंने अमन और शान्ति का पैगाम दिया और बता दिया कि इस्लाम कत्ल और गारतगिरी के पक्ष में नही है. जानबूझ कर किसी का कत्ल करने पर इस्लाम मे अदबी आज़ाब मुर्कर है. उन्होंने कहा कि इस्लाम तमाम मुसलमानों का मज़हब है .अल्फाज़ और नारों से हट कर अदल और इंसाफ की हकीकी तस्वीर पेश की. उन्होंने राष्ट्रप्रेम और समाज मे बराबरी की पैरोकारी की.वह कहा करते थे कि अपने शत्रु से भी प्रेम किया करो तो वह एक दिन तुम्हारा दोस्त बन जायेगा. उनका कहना है कि अत्याचार करने वाला ,उसमे सहायता करने वाला और अत्याचार से खुश होने वाला भी अत्याचारी ही है.
(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। ( islamicbiography.com) इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)








