रमजान क्या है |
रमजान इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण महीना है, जो इस्लाम के पांच महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। जो मुसलमानों द्वारा मनाया जाता है। यह एक धार्मिक उत्सव होता है, जो इस्लाम के लिए समर्पित होता है। इस महीने में मुसलमानों को रोजा रखना होता है, जिसे रोजा-ए-रमजान कहते हैं। यह उस समय तक चलता है जब तक ईद का चांद देखा नहीं जाता तबतक ईद-उल-फितर मनाई नहीं जाती है । इस महीने में मुसलमान लोग दिनभर खाने-पीने और जीवन की अन्य कुछ चीजों से परहेज करते हुए रोजा रखते हैं।
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| Ramjan | Roza | Eid | Namaz |
रोजा किसे कहते है |
रोजा अरबी शब्द 'रोजा' से आता है जो 'रुकना' या 'थम जाना' का अर्थ होता है। इसलिए रोजा रखने वाले लोगों को खाने-पीने और जीवन की अन्य चीजों से रुकना होता है
रोजा का मतलब होता है हर वह चीज से परहेज करना हो अल्लाह के तरफ से मन फ़रमाया गया है | रोजे में हमें सिर्फ खाने पिने से ही नही बल्कि हर बुरी चीजों से बचना होता है जैसे - झूठ बोलना , गली गलोज करना , आँखों से गलत चीजों न देखना , लोगो की बुराई न करना , इत्यादि
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| Ramjan | Roza | Eid | Namaz |
रोजे में क्या करना चाहिए और क्या नही |
इस माहीने में मुस्लिम लोग सुबह उठकर सेहरी करते है और शाम को सूर्य को ढूब जाने के बाद इफ्तार करते है । इस माहीने में मुस्लिमों को रोजा रखना पड़ता है, जो उन्हें सुबह सेहरी से लेकर शाम इफ्तार तक खाने पिने से ( भोजन ) करने से रुकना होता है
- रोजा रखने वाले को भोजन और पानी से दूर रहना चाहिए।
- बातचीत में जूठ न बोलना ,
- झूठ बोलना, गलतफहमी न फैलाना ,
- नफरत करना इत्यादि से दूर रहना चाहिए।
- रोजा रखने वालों को इस्लामी आदतों को अपना चाहिए |
- रोजा रखने वालों को अल्लाह की याद में ज्यादा वक्त वक्त गुजरना चाहिए |
- रोजा रखने वालों को सहरी और इफ्तार समय से करना चाहिए |
रोजा एक आयुर्वेदिक उपचार है, जो शरीर के बाहरी और आंतरिक VIROUS से लड़ने के लिए सक्षम होता है। इसके अलावा, यह रूह को संतुलित करने में भी मदद करता है | और शरीर के विकास में प्रोत्साहित करता है।
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| Ramjan | Roza | Eid | Namaz |
रोजा रखते समय, मुस्लिमों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोजा के दौरान भोजन नहीं करना होता है। समय से पहले उठकर सेहरी खाना और रोजा तब खोलना जब शाम का समय हो जाए , जन सूर्य ढूब जाये ।


